ईद-ए-मिलाद क्या है ? ईद-ए-मिलाद क्यों मनाया जाता है !!

ईद-ए-मिलाद-उन-नबी क्यों मनाया जाता है !!

यह मुसलमानों का एक बहुत प्रसिद्ध त्योहार है जिसे मुसलमान बड़ी धूमधाम से मनाते हैं. इसे मनाने के ऊपर कई प्रकार की टिप्पणी की गयी है. लेकिन अधिकतर लोगों का मानना है की यह त्यौहार पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिन की खुसी में मनाया जाता है. इस दिन पवित्र कुरान भी पढ़ी जाती है. ये त्यौहार एक दिसम्बर से दो दिसम्बर तक मनाया जाता है.

जहां कुछ लोगों का मत यह की आज के दिन पैगंबर हजरत मोहम्मद का जन्म हुआ था तो वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों इसे उनके म्रत्यु के रूप में मानते हैं. लेकिन सभी लोग इस त्यौहार को बड़ी श्रद्धा और धूमधाम से मनाते हैं.आज के दिन लोग रात भर बैठ कर प्रार्थना करते हैं इसमें सभी पैगंबर मोहम्मद के प्रतीकात्मक पैरों के निशान से प्रार्थना करते हैं और साथ ही बड़ी बड़ी झाकियां और जुलूस भी निकाले जाते हैं. इस त्यौहार में हजरत साहब को याद किया जाता है और उन्हें पढ़ा जाता है.

ईद-ए-मिलाद-उन-नबी का इतिहास क्या है | Eid-E-Milad History in Hindi !!

पैगंबर हजरत मोहम्मद को आखिरी संदेशवाहक और सबसे महान नबी के रूप में जाना जाता है. जिन्हे स्वयं अल्लाह ने अपने फरिश्ते जिब्रईल के द्वारा कुरान का सन्देश इन तक पहुचाया था. इस लिए इनके प्रति मुसलमानो में मन में बहुत आदर और सत्कार है. कहा जाता है की आज के दिन पैगंबर हजरत मोहम्मद का जन्म हुआ था. जो मुसलमानो के लिए बहुत बड़ा दिन था जिसके जश्न में ये त्यौहार मनाया जाता है.

कुछ लोगों का मानना है की इस दिन उन्हें कुरान की शिक्षा स्वयं अल्लाह के फ़रिश्ते ने दी थी जिसके चलते कुछ लोग इसे उनकी शिक्षा के लिए भी मनाते हैं. इस रात को सभाएं लगाई जाती हैं और कुरान की शिक्षा ली जाती हैं और माना जाता है की इस रात को शिक्षा लेने से जन्नत मिलता है.

सभी के मत अलग अलग होने के कारन यह भी माना जाता है कुछ लोगों के द्वारा की आज के दिन उनका देहांत हुआ था जिसके कारण आज का दिन उनके लिए शौक और मातम का दिन माना जाता है. कहा जाता है की हजरत साहब का जन्म इस्लाम के कैलेंडर के अनुसार रवि उल्ल अव्वल मास के 12वें दिन 570 ई. को मक्का जैसे पवित्र स्थान में हुआ था.

इनके जन्म का मत सिया द्वारा माना जाता है और सुन्नी द्वारा इस दिन को मातम की तरह मनाया जाता हैं क्यूंकि उनका मानना है की आज के दिन पैगंबर हजरत मोहम्मद का निधन हुआ था जिसके कारण सुन्नी समुदाय के लोग पुरे माह शौक मनाते हैं.

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