छठ पूजा क्या है ? छठ पूजा का इतिहास और महत्व क्या है !!

छठ पूजा क्या है !!

छठ पूजा एक हिन्दुओं का पर्व है जो दिवाली के कुछ दिन बाद आता है, इसे छठ पर्व, छठ या षष्‍ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाने की प्रथा है. इस पर्व के अनुसार इसमें माँ छठी और सूर्य देव की उपासना की जाती है. ये पर्व बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ तराई स्थानों में मनाया जाता है. हिन्दुओं के अलावा इन्हे कुछ इस्लामी और अन्यधर्म के लोग भी मनाते देखे गए हैं.

इसे लेके सभी लोगों की अपनी अपनी अलग अलग धारणा है इसे लेके लोगों के कई तथ्य हैं कोई इसे रामायण से जोड़ता है तो कोई इसे महाभारत से तो कोई इसके इतिहास को लेके कोई और कहानी की विषय में बताता है. जैसा की हमने बताया की इसे लेके कई प्रकार के इतिहास हैं तो आज हम आपको इसपूजा से जुड़े सारे इतिहास बताएंगे.

छठ पूजा का इतिहास / कहानी !!

छठ पूजा को लेके कई ऐतिहासिक कहानियां है तो आज हम आपको सारी कहानियां एक के बाद एक बताएंगे।

# छठ पूजा की शुरुआत राजा प्रियंवद के जमाने में हुई जब राजा प्रियंवद के कोई संतान न होने के कारण उन्होंने और उनकी पत्नी ने एक यज्ञ किया जिसे खुद महर्षि कश्यप ने करवाया जिसके बाद महर्षि कश्यप ने पुत्र की प्राप्ति के लिए आहुति के लिए बनाई गई खीर को राजा की पत्नी को दी. जिससे उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई लेकिन दुर्भाग्यवश वो पुत्र मरा हुआ पैदा हुआ.

जब राजा अपने मरे हुए पुत्र को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान ले गए तो वहां रो रो के खुद के प्राण त्यागने लगे तभी वहां भगवान की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं और उन्होंने राजा को रोका और कहा की यदि तुम मेरी पूजा करो और लोगों को मेरी पूजा करने की सलाह दो तो तुम पुत्र की प्राप्ति अवश्य होगी तब राजा ने उनकी पूजा आरम्भ की राजा ने जब यह पूजा आरम्भ की और पूरी की उस समय कार्तिक मास की षष्ठी थी तब से ही ये पूजा आरम्भ हो गयी.

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# कुछ लोगों का मानना है की इस पूजा का संबंध रामायण से है. जब राम, सीता और लक्षम, रावण का वध कर के १४ वर्ष बाद अयोध्या लौट के आये थे तब राम ने रावण के वध के पाप मुक्त होने के लिए राजसूर्य यज्ञ रखा था. उन्होंने यज्ञ हेतु मुग्दल ऋषि को आमंत्रित किया। मुग्दल ऋषि ने माता सीता पर गंगा जल छिड़क कर उन्हें पवित्र किया और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि सीता माता को सूर्यदेव की पूजा करने को कहा, जिसके लिए सीता माता मुग्दल ऋषि के आश्रम गयी और वहां रहकर छह दिनों तक सूर्यदेव भगवान की पूजा की थी। इस लिए छठ को मनाया जाता है.

# कुछ लोगों का कहना है की महाभारत में कर्ण जो की सूर्यदेव के प्रशाद थे वो सूर्य देव को बहुत मानते थे और उनकी रोज घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे।. इस लिए छठ पूजा में जल में खड़े होके अर्घ्य देने की की प्रथा है.

# एक कथा यह भी है की जब पांडव सब कुछ जुएं में हार कर वन को चले गए थे तब द्रोपदी ने सूर्यदेव की उपासना करते हुए छठ व्रत किया था तब पांडवों को उनकी सारी सम्पत्ति मिल गयी थी. लोक परंपरा के मुताबिक सूर्य देव और छठी मईया दोनों भाई बहन है इसलिए छठ के पर्व पे सूर्य देव की भी आराधना की जाती है.

छठ पूजा का महत्व क्या है !!

यह त्यौहार दिवाली के छठे दिन से शुरू होता है और चार दिन तक मनाया जाता है. इसे बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है. इसमें लोग अपना व्रत पूरा कर के सुखी, स्वस्थ और निरोगी होने की कामना करते हैं और इस पर्व के शुरू होने से पहले पुरे घर की अच्छे से साफ सफाई की जाती है. ये व्रत बहुत कठिन व्रत माना गया है. लेकिन श्रद्धालुओं की श्रद्धा इसे उनके लिए आसान बना देती है.

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छठ पूजा गीत वीडियो !!

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