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लोक नृत्य और शास्त्रीय नृत्य में क्या अंतर होता है !!

लोक नृत्य और शास्त्रीय नृत्य में क्या अंतर होता है !!

हमारे भारतवर्ष में नृत्य का बहुत बड़ा महत्व है। भारत की संस्कृति और धार्मिक दोनों ही परंपराओं में नृत्य का बहुत ही ज्यादा महत्व रहता है । हमारे भारत में प्राचीन काल से ही नृत्य का प्रचलन रहा है । हमारे भारतीय समाज के अंदर पुरानी देवी देवताओं के समय से भी नृत्य देवेंद्र इंद्र का अच्छा नृत्यक होना , स्वर्ग में अप्सराओं द्वारा किए जाने वाले  नृत्य का जुड़ाव हमारे जहन में रहता है। नृत्य का संबंध एक मनोवैज्ञानिक पक्ष भी माना जाता है। एक बात तो यह स्पष्ट होती है कि नृत्य हमारे पुराने धर्मों से ही जुड़ा हुआ है। जिसके साथ साथ यह मनोरंजन से भी तो जुड़ा हुआ है और धर्म अर्थ काम और मोक्ष का भी एक अच्छा साधन है। पुराने समय में भगवान शिव को भी एक नृत्यक अर्थात नटराज के रूप में भी पूजा जाता है। नृत्य को हमारे देवी देवताओं द्वारा प्रिय माना गया है । शास्त्रों के अनुसार देखा जाए तो भगवान विष्णु के सभी अवतारों में से सबसे श्रेष्ठ कृष्ण जी भी अच्छे नृत्यवार रहे हैं इसी कारण से भगवान श्री कृष्ण जी को नटवर भी कहा जाता है । हमारी भारतीय संस्कृति और धर्म के शास्त्रों को देखा जाए तो ऐसे बहुत उदाहरण मिल सकते हैं जिसके अंदर नृत्य को एक सफल कला के रूप में मान्यता दी गई है।

Difference between Folk Dance and Classical Dance in
लोक नृत्य और शास्त्रीय नृत्य में अंतर | Folk Dance and Classical Dance Difference in Hindi !!
Hindi !!

लोक नृत्य क्या है | WHAT IS FOLK DANCE in Hindi !!

भारत के अंदर लोक नृत्य में बहुत प्रकार के स्वरूप और ताल पाए जाते हैं। इसमें से कुछ लोक नृत्य धर्म व्यवसाय और जाति के आधार पर अलग अलग प्रकार से पाए जाते हैं । भारत के अंदर मध्य और पूर्वी जनजातियों के लोग सभी अवसरों पर लोक नृत्य करते हैं। जीवन चक्र की रिती और ऋतु के वार्षिक अवसर पर अलग-अलग नृत्य का आयोजन किया जाता है भारतीय समाज में अंदर देखा जाए तो दैनिक जीवन और धार्मिक अनुष्ठानों का भी एक महत्वपूर्ण अंग नृत्य है । धीरे-धीरे बदलते हुए समाज के अंदर जीवन शैलियों के अंदर बहुत परिवर्तन आने पर नृत्य की परासंगीता विशिष्ट शहरों में भी आगे पहुंच गई है । हमारे समाज के अंदर चाहे कोई भी अवसर हो या उत्सव हो या फिर सामाजिक आयोजन नृत्य का दिखाई देना सामान्य सी बात है । भारत के अंदर लोक नृत्य को गिना जाना और उनका वर्गीकरण करना बहुत ही कठिन बात है लेकिन सामान्य तौर पर इन्हें चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है

  1. वृत्तिमूलक लोक नृत्य ( जिसके अंदर जुताई, बुआई, मछली पकड़ना और शिकार जैसे नृत्य किए जाते हैं)
  2. धार्मिक लोक नृत्य
  3. आनुष्ठानिक लोक नृत्य( इसके अंदर तांत्रिक अनुष्ठान द्वारा प्रसन्न कर देवी या दानव-प्रेतात्मा के कोप से मुक्ति के लिए नृत्य किया जाता है)
  4. सामाजिक लोक नृत्य (ऐसा प्रकार जो उपरोक्त सभी वर्गों में शामिल है)।

 

लोक नृत्य और शास्त्रीय नृत्य में अंतर | Folk Dance and Classical Dance Difference in Hindi !!

शास्त्रीय नृत्य क्या है | WHAT IS CLASSICAL DANCE in Hindi !!

भारत के अंदर शास्त्रीय नृत्य काम भी लोक नृत्य की भांति ही बहुत ज्यादा महत्व है। शास्त्रीय नृत्य बहुत ही पुराने हिंदू ग्रंथों के सिद्धांतों और उनके कार्यशैली पर आधारित है। शुरूआती डोर के अंदर यह माना जाता था कि भरत नाट्यशास्त्र को दूसरी शताब्दी ईशा पूर्व के समय में लिखा गया था। शास्त्रीय नृत्य की अधिकतम शैलियां प्राचीन शैलियों से मेल खाती है । शास्त्रीय नृत्य की अधिकतम मशहूर कार्य विधियां बहुत ही उच्च प्रकार की विस्तृत प्रणालियों से संबंध रखती है । लोक नृत्य तथा शास्त्रीय नृत्य के मध्य के अंतर यही है कि पूर्वांअंतर में इन दोनों को जानबूझकर एक कलात्मक का रूप दिया गया था इसके बावजूद नृत्य और नाटक शैली अपने सिद्धांतों और नियमों आप बहुत ही सख्ती से पालन करते हैं । शास्त्रीय नृत्य के अंदर भावना में चित्रित अवधारणा, कला की भावना तथा व्यक्तिगत नृत्य की उपलब्धि बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं

  • भरतनाट्यम तमिलनाडु
  • कथकली केरल
  • मोहिनीअट्टम केरल
  • ओडिसी उड़ीसा
  • कुचिपुड़ी आंध्र प्रदेश
  • मणिपुरी मणिपुर
  • कथक उत्तर भारत मुख्य रूप से यू.पी.
  • सत्त्रिया नृत्य असम

Ankita Shukla

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