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Assistant Professor और JRF में क्या अंतर है !!

नमस्कार दोस्तों…आज हम आपको “JRF और Assistant Professor” के विषय में बताने जा रहे हैं. आज हम बताएंगे कि “JRF और Assistant Professor क्या है और इनमे क्या अंतर होता है?”. हमेशा लोग जब इस फील्ड में जाने का सोचते हैं, तो उन्हें अक्सर ये दिक्क्त आती है कि दोनों में आखिर कौन सा करना ज्यादा अच्छा रहेगा और दोनों में क्या अंतर है. इन्ही सब दुविधा को दूर करने के लिए आज हम इस टॉपिक को लेके आये हैं. तो चलिए शुरू करते हैं आज का टॉपिक.

Assistant Professor क्या है | What is Assistant Professor in Hindi !!

आप सभी ने National Eligibility Test (NET) का नाम तो सुना ही होगा. ये एक एंट्रेंस एग्जाम है जिसे University Grants Commission (UGC) द्वारा कंडक्ट कराया जाता है. ये भारत में विभिन्न प्रकार के कॉलेज, यूनिवर्सिटी और अन्य शैक्षिक संस्थानों में Lecturers या Assistant Professors के रूप में करियर की शुरुआत के लिए सबसे अच्छी प्रवेश परीक्षा मानी जाती है. इसे वर्ष में दो बार आयोजित किया जाता है पहला जून और दूसरा दिसंबर में. इनके नोटिफिकेशन मार्च और सितम्बर में ही आना शुरू हो जाते हैं. साथ में University Grants Commission (UGC) द्वारा एक और भी परीक्षा कराई जाती है, जिसे Junior Research Fellowship (JRF) के नाम से जाना जाता है, ये वो लोग दे सकते हैं, जिन्होंने NET qualify कर लिया होता है और रिसर्च फील्ड में जाना चाहते हैं.

अब बात यदि असिस्टेंट प्रोफेसर की की जाये तो, इसके लिए किसी भी कैंडिडेट को National Eligibility Test(NET) क्वालीफाई करना पड़ता है. जिसके बाद वो भारत के किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में Lecturer/Assistant Professor के लिए अप्लाई कर सकता है. इसमें इनका कार्य छात्रों को पढ़ाना होता है.

JRF (Junior Research Fellowship) क्या है | What is JRF (Junior Research Fellowship) in Hindi !!

जब कोई कैंडिडेट NET-JRF को अच्छे रैंक से क्वालीफाई करता है, तो वो विभिन्न संस्थान और यूनिवर्सिटी में Ph.D. के लिए एडमिशन ले सकता है. NET मात्र क्वालीफाई करने से कोई भी कैंडिडेट को कोई भी अच्छा कॉलेज या यूनिवर्सिटी मिल जायेगी तो ये गलफहमी है. क्यूंकि NET क्वालीफाई करने के बाद एक इंटरव्यू बोर्ड को भी फेस करना पड़ता है.

जिन कैंडिडेट ने JRF परीक्षा उत्तीर्ण कर ली होती है, वो रिसर्च के साथ लेक्चररशिप के लिए भी एलिजिबल होते हैं. इनके पास कई विकल्प हो जाते हैं अपने करियर को लेके। ये प्रोफेसर, Researcher दोनों में से किसी को भी चुन सकते हैं और इन्हे साथ ही स्कालरशिप जैसी सुविधा भी दी जाती है. इन्हे हर माह 25,000 रुपए स्टिपेन्ड दिया जाता है. ये दो साल के लिए दी जाती है और इसके बाद कैंडिडेट पीएचडी के लिए रजिस्टर कर सकता है और अपनी फ़ेलोशिप को अपग्रेड कर के SRF (NET) के रूप में स्टिपेन्ड बढ़वा सकता है. ये हर माह 28,000 रुपए होती है.

Difference between JRF and Assistant Professor in Hindi | Assistant Professor और JRF में क्या अंतर है !!

Difference between JRF and Assistant Professor in Hindi | Assistant Professor और JRF में क्या अंतर है !!

# Assistant Professor के लिए NET एग्जाम क्वालीफाई करके इंटरव्यू बोर्ड को फेस करना होता है जबकि JRF के लिए NET एग्जाम और JRF दोनों एग्जाम क्वालीफाई करने होते है.

# Assistant Professor, कॉलेज, यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर की पोस्ट है जबकि JRF का पूरा नाम Junior Research Fellowship है, जो रिसर्च फील्ड के लिए होता है.

# Assistant Professor के लिए आपको केवल NET एग्जाम क्वालीफाई करना होता है जबकि JRF के लिए NET और JRF दोनों एग्जाम क्वालीफाई करने होते हैं.

# Assistant Professor बनने के बाद आपको सैलरी मिलती है जबकि JRF के बाद आप किसी भी फील्ड में किसी भी इंस्टिट्यूट में एडमिशन लेके पीएचडी कर सकते हैं और इस दौरान आपको 25,000 रुपए की स्टिपेन्ड भी मिलती है.

उम्मीद करते हैं कि आपको हमारे द्वारा दी गयी जानकारी अच्छी लगी होगी. और आपके काफी काम भी आयी होगी. यदि आपको फिर भी कोई कमी, गलती दिखाई दे तो आप हमे नीचे दिए गए कमेंट सेक्शन में कमेंट कर सकते हैं. और साथ ही यदि कोई सवाल या सुझाव आपके मन में हो तो वो भी आप हमसे पूछ व बता सकते हैं. धन्यवाद !!

Ankita Shukla

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This Post Has One Comment

  1. Anchu

    JRF के दो अलग अलग पेपर देने है क्या?

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