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फौजदारी और दीवानी में क्या अंतर है !!

नमस्कार दोस्तों…आज हम आपको “फौजदारी और दीवानी” के विषय में बताने जा रहे हैं. आज हम बताएंगे कि “फौजदारी और दीवानी क्या है और इनमें क्या अंतर होता है?”. दीवानी मामले संपत्ति सम्बन्धी या पद सम्बन्धी अधिकार विवादित होते हैं और फौजदारी मामले आपराधिक मामले होते हैं, जिसमे भारतीय दंड संहिता तथा अन्य बहुत से कानूनों के द्वारा दंडनीय अपराध घोषित किया गया है. आज हम आपको इन्ही दोनों के विषय में जानकारी देने का प्रयास करेंगे. तो चलिए शुरू करते हैं आज का टॉपिक.

दीवानी क्या है | What is Diwani in Hindi !!

दीवानी मामले उन मामलों को कहते हैं, जिनमे संपत्ति सम्बन्धी या पद सम्बन्धी अधिकार विवादित होते हैं फिर चाहे ऐसा विवादित अधिकार धार्मिक कृत्यों या कर्मों सम्बन्धी प्रश्नों पर ही अवलम्बित क्यों न हो। जब भी कोई सम्पत्ति संबंधी, पद सम्बन्धी अधिकार, जैसे मामले सामने आते हैं, तो उन्हें दीवानी वाद या मुकदमा कहा जाता है और इन्हे दीवानी अदालत में पेश किया जाता है.

दीवानी अदालत में कई प्रकार के मामले देखे जाते थे, जैसे कि: कृषि भूमि से सम्बन्धित मामले, मोटर यान या रेल दुर्घटना से संबंधित मामले, या श्रमिकों व उन के नियोजकों के मध्य विवाद, सरकारी कर्मचारियों की सेवा से संबंधित मामले, आदि. लेकिन दीवानी अदालत के कार्यभार को देखते हुए इन के संबंध में संसद ने विशेष कानून बना दिए हैं, जिन्हे दीवानी न्यायालयों के क्षेत्राधिकार से बाहर रखा गया है और इनके लिए अलग से अधिकरण भी बनाए गए हैं. लेकिन ये सब मामले दीवानी मामले ही कहे जाते हैं.

फौजदारी क्या है | What is Faujdari in Hindi !!

फौजदारी मामले उन मामलों को कहा जाता है, जो आपराधिक मामले होते हैं और इनके लिए भारतीय दंड संहिता तथा अन्य बहुत से कानूनों के द्वारा कुछ दंड निर्धारित किये गए हैं. जब किसी व्यक्ति को कोई अपराध करने के लिए दंड दिए जाने हेतु विचारण किया जाए, तो वे सभी मामले अपराधिक या फौजदारी मामले होते हैं. फौजदारी मामलों को मजिस्ट्रेट द्वारा देखा जाता है, मजिस्ट्रेट को हम को दंडाधिकारी भी कहते हैं.

फौजदारी मामले को दाण्डिक मामले या क्रिमिनल केस भी कहा जाता है. इन मामलों में वो मामले आते हैं, जो अपराध के लिए प्रावधान है और जिनमें दंड की मांग की जाती है। इसमें चोरी, डकैती, कत्ल, बलत्कार, दहेज़प्रथा, धोखाधड़ी, आदि मामले शामिल है. ये मामले क्रिमिनल कोर्ट में ले जाये जाते हैं और मजिस्ट्रेट भी वहीं अपना फैसला सुनाता है.

Difference between Faujdari and Diwani in Hindi | फौजदारी और दीवानी में क्या अंतर है !!

# दीवानी के मामले जज देखता है और फौजदारी के मामले मजिस्ट्रेट देखता है. जज को हम न्यायाधीश के नाम से और मजिस्ट्रेट को दंडाधिकारी के नाम से भी जानते हैं.

# दीवानी मामले उन मामलों को कहते हैं, जिनमे संपत्ति सम्बन्धी या पद सम्बन्धी अधिकार विवादित होते हैं फिर चाहे ऐसा विवादित अधिकार धार्मिक कृत्यों या कर्मों सम्बन्धी प्रश्नों पर ही अवलम्बित क्यों न हो जबकि फौजदारी में उन मामलों को रखा जाता है जो अपराध की श्रेणी में आते हैं और भारतीय दंड संहिता तथा अन्य बहुत से कानूनों के द्वारा उनपर कुछ दंड निर्धारित किये गए हैं.

# दीवानी मामले कृषि भूमि से सम्बन्धित, मोटर यान या रेल दुर्घटना से संबंधित, या श्रमिकों व उन के नियोजकों के मध्य विवाद, सरकारी कर्मचारियों की सेवा से संबंधित, आदि होते हैं जबकि फौजदारी मामले में चोरी, डकैती, कत्ल, बलत्कार, दहेज़प्रथा, धोखाधड़ी, आदि शामिल है.

दीवानी मामलों को दीवानी अदालत में और फौजदारी मामलों को फौजदारी अदालत में लाया जाता है.

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Ankita Shukla

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